कैसे लिखूं कविता तुमपर,
मेरी वो हैसियत, काबिलियत नहीं है।
आसमान को ज़मी पर उतारूं,
वो हुनर आज भी नहीं है।
तू अरमान थी, वरदान थी, दिलोजान थी,
हमारी दुनिया, तुझसे ही रौशन, महका जहान थी।
इस बाग की तू बागवान थी।
"मां तू महान थी।"
भगवती स्वरूपा, हमारी भगवान थी।
ये जिस्म, सांसें, संस्कार सब तेरी पहचान है।
तू हिम्मते जहान, शख्सियतें महान थी,
दिलदार और प्यारी, हर दिलों की मुस्कान थी।
मैं क्या लिखूं, आप बहुत महान थी।
दिलों में उम्मीद, हौसलों का तूफ़ान थी।
सुलझी, सरल व्यक्तित्व पर कद में आसमान थी।
हमारी दुनिया और खुशियों का चाँद थी।
"मां तू महान थी।"
सुबह की राम राम और आपके ज़िंदगी की शाम को सलाम है।
जीना इसी का नाम है, जीना इसी का नाम है।
तू अरमान थी, वरदान थी, दिलोजान थी
तू हिम्मते जहान, शख्सियतें महान थी
दिलों में उम्मीद, हौसलों का तूफ़ान थी।
सुलझी, सरल व्यक्तित्व पर कद में आसमान थी।
हमारी दुनिया और खुशियों का चाँद थी।
"मां तू महान थी।
इस बाग की तू बागवान थी।
तू हिम्मते जहान, शख्सियतें महान थी,
दिलों में उम्मीद, हौसलों का तूफ़ान थी।
सुलझी, सरल व्यक्तित्व पर कद में आसमान थी।
हमारी दुनिया और खुशियों का चाँद थी।
"मां तू महान थी।"
_अंजली।